जानिए Demat Account के बेनिफिट्स

5 Apr 2021  Read 174 Views

अगर आप शेयर मार्किट में निवेश करते है या फिर इसके बारे में जानकारी रखते है तो आपने एक नाम तो जरूर सुना होगा और वो है डीमैट अकाउंट।

तो आज के इस आर्टिकल में हम डीमैट अकाउंट तथा इसके बेनिफिट्स के बारे में ही चर्चा करेंगे -

Demat Account क्या है?

डीमैट अकाउंट (Dematerialised Account) को एक ऐसे इलेक्ट्रॉनिक स्टोर के रूप में समझा जा सकता है जो हमारे शेयर्स तथा सिक्योरिटीज को स्टोर करता है।

जिस प्रकार से हम अपनी बुक्स को अपने बैग में रखते है वैसे ही हमारे शेयर्स या अन्य सिक्योरिटीज को डीमैट अकाउंट में रखा जाता है लेकिन इसके बारे में ख़ास बात यह है कि इसमें सिक्योरिटीज तथा शेयर्स को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में स्टोर किया जाता है।

डीमैट अकाउंट का पूरा नाम है - Dematerialized Account जिसका मतलब होता है हमारे खरीदे हुए फिजिकल शेयर्स के सर्टिफिकेट को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में कन्वर्ट करना। ऐसा करने के बाद निवेशकों को अपने शेयर्स की परफॉरमेंस देखने में आसानी होती है तथा सारा काम ऑनलाइन ही हो जाता है।

अब हम यह जानेंगे कि डीमैट अकाउंट कितने प्रकार के होते है -

डीमैट अकाउंट के प्रकार -

डीमैट अकाउंट के मुख्य प्रकार निम्नलिखित है -

Regular Account 

भारत में रहने वाले आम निवेशक के लिए यह अकाउंट सबसे उपयुक्त है। सबसे ज्यादा प्रसिद्ध तथा सामान्य अकाउंट यही है।

Repatriable Demat Account 

यह अकाउंट NRIs के लिए उपयुक्त है। इस अकाउंट की सहायता से आप विदेश में भी फण्ड ट्रांसफर कर सकते हो। एक NRI अगर यह अकाउंट खुलवाना चाहता है तो उसको इसके लिए एक NRE ( Non-Resident External ) बैंक अकाउंट खुलवाना होगा।

Non-Repatriable Demat Account 

यह अकाउंट भी NRIs द्वारा ही उपयोग में लाया जाता है लेकिन इसमें विदेश में फण्ड का ट्रांसफर नहीं कर सकते। यह अकाउंट खुलवाने के लिए पहले एक NRO ( Non-Resident Ordinary ) बैंक अकाउंट खुलवाना जरूरी है।

Basic Service Demat Account 

जिन निवेशकों का पोर्टफोलियो काफी छोटा होता है तथा जो कम ट्रेड करना चाहते है उनके लिए यह अकाउंट एक सही विकल्प है। अगर कोई निवेशक 2 लाख रूपये से कम की होल्डिंग रखता है तो उसके लिए यह अकाउंट एक अच्छा ऑप्शन है। अगर आपकी होल्डिंग 50 हजार रूपये से कम है तो आपको किसी भी प्रकार के Maintenance Charge भी नहीं भरना पड़ेगा।

इस प्रकार छोटे निवेशकों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।

डीमैट अकाउंट Vs ट्रेडिंग अकाउंट 

हमने डीमैट अकाउंट के मतलब तथा इसके प्रकार के बारे में तो जान लिया लेकिन अगर बात डीमैट अकाउंट की हो रही हो तथा ट्रेडिंग अकाउंट के बारे में चर्चा न की जाए तो चर्चा अधूरी लगती है।

ट्रेडिंग अकाउंट एक ऐसा अकाउंट होता है जिसका उपयोग फंड्स के ट्रांसफर तथा सिक्योरिटीज की खरीददारी-बिकवाली के लिए होता है।

डीमैट अकाउंट में हम अपने शेयर्स को स्टोर करते है लेकिन उनको खरीदने तथा बेचने का काम ट्रेडिंग अकाउंट का होता है। इसके अलावा शेयर्स खरीदने के लिए आवश्यक फण्ड की सप्लाई भी ट्रेडिंग अकाउंट के माध्यम से ही होती है।

इसके विपरीत डीमैट अकाउंट हमारे खरीदे हुए शेयर्स की परफॉरमेंस को Track करता है।

निष्कर्ष के रूप में हम इतना कह सकते है कि ट्रेडिंग अकाउंट में हम अपने फंड्स को स्टोर करते है जबकि डीमैट अकाउंट में हम खरीदे हुए शेयर्स तथा सिक्योरिटीज को स्टोर करते है।

डीमैट अकाउंट होने के फायदे 

हमने डीमैट अकाउंट के बारे में तो जान लिया लेकिन अब हम यह चर्चा करेंगे कि डीमैट अकाउंट की जरूरत क्यों पड़ती है तथा इसके फायदे क्या है -

सेबी ने यह प्रावधान निकल रखा है कि एक निवेशक के पास डीमैट अकाउंट होना अनिवार्य है। सेबी ने यह नियम 1996 में लागु किया था। इसलिए आपको इतना तो समझ आ ही गया होगा कि अगर शेयर्स में निवेश करना है तो डीमैट अकाउंट के बिना तो इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते।

अब आइये इसके बेनिफिट्स के बारे में चर्चा करते है -

  • डीमैट अकाउंट में हम शेयर्स तथा सिक्योरिटीज को स्टोर तो कर ही सकते है लेकिन इसके साथ-साथ हमारे शेयर्स इसमें सुरक्षित भी रहता है तथा खोने या चोरी हो जाने का डर भी नहीं रहता।

  • एक डीमैट अकाउंट की मदद से शेयर्स का ट्रांसफर आसानी से होता है इसकी मदद से आप बड़े ही सुलभ तरीके से अपने खरीदे हुए शेयर्स को इसमें ट्रांसफर कर सकते है।

  • डीमैट अकाउंट की मदद से आप अपने शेयर्स की परफॉरमेंस कही से भी अपने स्मार्टफोन में देख सकते हो जिससे निवेशकों को काफी सहूलियत मिलती है।

  • डीमैट अकाउंट होने पर आप स्टाम्प ड्यूटी जैसे Charges से बच जाते है।

Minors के लिए डीमैट अकाउंट 

वैसे वैधानिक रूप से तो 18 साल से कम उम्र के नागरिकों (Minors) को स्टॉक मार्किट में ट्रेडिंग करने की परमिशन नहीं दी गयी है लेकिन आप अपने अन्य बालिग की देखरेख में यह कर सकते है।

जब तक किशोर 18 वर्ष के नहीं हो जाते तब तक डीमैट अकाउंट को अभिभावकों की देखरेख में ही संचालित किया जाएगा। इसके अलावा डीमैट अकाउंट ऑपरेट करने के लिए अभिभावक के रूप में सिर्फ पिता को ही अनुमति दी गई है या फिर उनकी अनुपस्तिथि में माता को अनुमति दी गयी है तथा अगर किसी कारणवश ये दोनों ही अनुपस्थित होने पर कोर्ट द्वारा घोषित अभिभावक को Minor के डीमैट अकाउंट की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।

अगर किसी नाबालिग के पास बैंक अकाउंट नहीं है तो भी वह डीमैट अकाउंट खुलवा सकता है लेकिन अभिभावक के पास डीमैट अकाउंट होना जरूरी है।

एक नाबालिग के लिए डीमैट अकाउंट खुलवाने की प्रक्रिया इस प्रकार है -

  • अभिभावक को सम्बंधित Depository Participant (DP) को एड्रेस प्रूफ, उम्र तथा पहचान पत्र तथा कुछ फोटोग्राफ्स प्रदान करने होंगे।

  • अभिभावक तथा नाबालिग दोनों को अपने पैन कार्ड की डिटेल्स DP को प्रदान करनी होगी।

  • डाक्यूमेंट्स का वैरिफिकेशन होने के बाद नाबालिग के लिए एक डीमैट अकाउंट खुल जाएगा।

एक माइनर डीमैट अकाउंट की कुछ लिमिटेशंस इस प्रकार है -

  • इस अकाउंट की मदद से इंट्राडे ट्रेडिंग नहीं कर सकते।

  • Minors एक जॉइंट डीमैट अकाउंट नहीं खुलवा सकते।

  • Minors केवल डिलीवरी आधारित ट्रेडिंग ही कर पाएंगे अर्थात उनको किसी भी प्रकार का अतिरिक्त मार्जिन उपलब्ध नहीं करवाया जाएगा।

  • Minors अपने डीमैट अकाउंट तथा ट्रेडिंग अकाउंट को लिंक नहीं कर सकते।

निष्कर्ष 

तो इस प्रकार हमने इस आर्टिकल में डीमैट अकाउंट तथा ट्रेडिंग अकाउंट के बारे में चर्चा की तथा साथ ही यह भी जान लिया कि एक डीमैट अकाउंट के बेनिफिट्स क्या है तथा यह होना क्यों जरूरी है।

अगर आप भी शेयर मार्किट में निवेश करना चाहते है तो आपको जितना जल्दी ही सके उतना जल्दी निवेश करना शुरू कर देना चाहिए क्योंकि शेयर मार्किट लम्बे समय में अच्छे रिटर्न देता है तथा उसका ज्यादा से ज्यादा फायदा आप तभी उठा पाओगे जब आप जल्दी स्टार्ट कर देते हो।

हम आशा करते है कि यह आर्टिकल आपके लिए लाभदायक साबित होगा तथा आपको जरूर कुछ नया सिखने को मिलेगा।

धन्यवाद !!

About the Author: Koja Ram | 28 Post(s)

Koja Ram is a 2nd year B Tech student at National Institute of Technology Jalandhar pursuing Chemical Engineering. He has a great ability to explain complicated financial terms in simple hindi language. He has an aim to make India financially literate. 

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