Farm bill 2020 के सकारात्मक तथा नकारात्मक पक्ष

10 Feb 2021  Read 1762 Views

जब से भारत सरकार ने किसान बिलों को पारित किया है तभी से सभी लोग इसके बारे में अपनी अलग अलग राय दे रहे है। टीवी चैनल से लेकर गावों के नुक्कड़ तक इन्ही के बारे में चर्चा हो रही है। हालाँकि इन नए किसान बिलों के अनुसार किसान अपनी फसल किसी भी राज्य में बेच सकेंगे तथा इसके पीछे सरकार की मंशा यही है कि एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण किया जाए जिससे किसानों तथा व्यापारियों को अपनी पसंद तथा सहूलियत के अनुसार ख़रीद-फरोख्त करने का मौका मिलेगा तथा एक राज्य से दूसरे राज्य में फसल की बिक्री की छूट के चलते किसानों को काफी विस्तृत बाजार उपलब्ध हो पाएगा। 

अगर हम थोड़ा इतिहास के पन्नों को पलट कर देखे तो हम पाएंगे कि सन 1800 के आसपास किसानों को अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता था जिसमे फसलों के दाम काम मिलते थे तथा अति-उत्पादन जैसी समस्याएं भी थी। इसके साथ ही किसानों को ऋण भी काफी ऊंची ब्याज दरों पर मिलता था तथा ट्रांसपोर्ट के खर्चे भी काफी ज्यादा थे। वर्तमान में जो एम-एसपी की व्यवस्था देशभर में चालू है उसमे एक बड़ी समस्या यह है कि अनेक प्रकार के बिचौलिए तथा कमीशन एजेंट से किसानों का सामना होता है जिसके कारण कई जगहों पर रिश्वतखोरी जैसी घटनाएँ भी सामने आती रहती है। 

हकीक़त में 90% से भी ज्यादा किसानों की पहुँच एम-एसपी तक नहीं है तथा एम-एसपी के कारण अनेक प्रकार के राजनितिक मुद्दे भी समय-समय पर उठते रहे है। वर्तमान डाटा के अनुसार केवल 6% किसान ही एम एसपी की सुविधा का लाभ उठा पाते है तथा इसके तहत अपनी फ़सलों के बिक्री करते है। 

Farm Bill 2020 : किसानों की मांगें

  • किसान इन तीनों बिलों के विरोध में है तथा इन तीनों बिलों को हटाने की मांग कर रहे है। 

लेकिन सरकार ने विरोध प्रदर्शन के बीच लोक सभा में इन 3 बिलों को पास कर दिया है जो इस प्रकार है - "Farmers' Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020" तथा "The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance" तथा "Farm Services Bill, 2020"

  • हालाँकि मंडी सिस्टम को बरक़रार रखा गया है तथा इससे संबंधित लोन की मंजूरी भी दे दी गयी है। 

अब किसान यह दावा कर रहे है कि मंडी सिस्टम को खत्म किया जा रहा है लेकिन हकीक़त में ये बिल मंडी सिस्टम के साथ-साथ एक फ्री ट्रेड की व्यवस्था बनाने पर आधारित है। इसके साथ ही एम-एसपी के सिस्टम को इस नई व्यवस्था में किसी भी रूप में नकारा नहीं गया है। मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार इस नई व्यवस्था से फसलों की खरीद-फरोख्त मंडियों के बाहर भी आसानी से हो पाएगी। 

  • राष्ट्रिय किसान आयोग की 2006 की स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागु किया जाना चाहिए जिसके अनुसार MSP में मिलने वाले न्यूनतम भाव फसल की लागत से 50% से अधिक होने चाहिए तथा अगर इस प्रकार से भुगतान नहीं किया जाता है तो वैधानिक दंड का प्रावधान होना चाहिए। 

  • एक ऐसा कानून भी लागु किया जाना चाहिए जो यह सुनिश्चित करता हो कि फसल का सही मूल्य किसानों तक पहुंचना चाहिए ताकि बिचौलिए फसल को सस्ते दामों में खरीदकर महंगे दामों में न बेच पाए। 

Farm Bill के फायदे तथा नुकसान :-

फायदे :

  • किसान स्वतंत्र तरीके से अपनी फसल की बिक्री कर पाएंगे तथा यह व्यवस्था काफी फ्लेक्सिबल भी है। 
  • अगर किसान अपनी मंडी के क्षेत्र से बाहर अपनी फसलों की बिक्री करेंगे तो किसानों को अपने फसल के लिए एक विस्तृत बाजार की सुविधा मिल पाएगी तथा किसान अपनी फसलों के सर्वोत्तम भाव ले पाएंगे। 
  • नए नियमों के अनुसार सिस्टम में कोई एकाएक बदलाव नहीं आएगा जबकि जो व्यवस्था चल रही है उसी के साथ-साथ ही नई व्यवस्था को लागु किया जा रहा है। इसके अनुसार किसान अपनी फसलों को वैश्विक स्तर पर भी बेच सकते है लेकिन यह सारा काम e-NAM सिस्टम के माध्यम से ही हो पाएगा। 
  • Essential Commodities Act में संशोधन किया गया है जिसके अनुसार अगर कोई व्यापारी किसानों की फसल खरीदकर उसका स्टॉक करेंगे तो उनको दण्डित किया जाएगा। 
  • नए बिलों के अनुसार इस बात का ख़ास तौर पर ध्यान रखा गया है कि किसानों को अपनी फसलों के अच्छे भाव मिल सकें तथा कृषि क्षेत्र को और ज्यादा विकसित किया जा सकें। 
  • 20 सितम्बर को माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था कि MSP सिस्टम बना रहेगा तथा सरकारी खरीद की व्यवस्था जारी रहेगी। कृषि मंत्री ने भी कहा कि इससे पहले की सरकारों ने भी कभी MSP के लिए कानून को लाना इतना जरूरी नहीं समझा। 
  • वर्तमान APMC सिस्टम के तहत किसानों को अपनी फसलों को बेचने के लिए मंडियों में एक व्यापारी के माध्यम से अपनी बिक्री करनी होती है ताकि फसल को बेचा जा सकें। हालाँकि इस सिस्टम में व्यापारी अपनी मिलीभगत से एक गिरोह बना लेते है तथा इसके कारण किसी प्रकार का कम्पटीशन का माहौल नहीं बन पाता जिसके कारण किसानों को अपनी फसल न्यूनतम मूल्य या MSP पर बेचनी पड़ती है। 

नुकसान :

  • नए बिलों के आने से APMC सिस्टम में के अवरोध उतपन्न होता है क्योंकि अब फसलें बाहर की मंडियों में भी बेचीं जाएगी। 

  • The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill में MSP की वैधानिकता का कोई जिक्र नहीं है। हालाँकि किसान यह चाहते है कि MSP की गारंटी दी जानी चाहिए या उसके बारे में वर्णन तो होना चाहिए लेकिन इस बिल में MSP का किसी भी प्रकार का वर्णन नहीं है। 

  • सरकार ने MSP के बारे में जो नियम लागु कर रखे है उनके इम्प्लीमेंटेशन के बारे में कोई योजना या फिर कानून अभी तक जारी नहीं हुआ है। 

  • केवल गन्ने की फसल के लिए MSP के इम्प्लीमेंटेशन के बारे में थोड़ी बहुत कार्रवाई होती है और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि Essential Commodities Act के तहत Sugarcane (Control) Order , 1966 इसके बारे ने कानूनी मान्यता प्रदान करता है। 

  • नए बिलों के अनुसार किसानों तथा व्यापारियों के बीच के मामले की सुलह के लिए कोर्ट की बजाय सिविल सर्वेन्ट्स द्वारा यह काम किया जाएगा। 

दिल्ली चलो आंदोलन

हरियाणा तथा पंजाब के लाखों किसान अपने ट्रैक्टर्स तथा गाड़ियों के माध्यम से दिल्ली बार्डर पर पहुंच चुके है तथा गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में ट्रैक्टर्स की रैली भी निकाली गयी थी तथा स्थिति काफी नाज़ुक हो गयी थी। सरकार किसानों के साथ कई बार वार्ता भी कर चुकी है लेकिन किसी प्रकार की सुलह अब तक नहीं हो पाई है तथा अब सरकार किसान नेताओं के साथ मिलकर ही किसी प्रकार आगामी कदम उठाएगी ऐसी आशा है। 

आधार

 किसान आंदोलन

 महत्वपूर्ण बिंदु     

  • The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance (major Protest on this Ordinance)

  • The Essential Commodities (Amendment) Ordinance, and;

  • The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance, 2020. 

आंदोलन का कारण

किसानों को इस बात का डर है कि इससे मंडी व्यवस्था प्रभावित होगी तथा इससे MSP की व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा

बैकग्राउंड

किसान अपनी फसलों को MSP पर राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित मंडियों में बेचते है। नए बिल में यह कहा गया है कि अब किसान राज्य सरकार द्वारा संचालित मंडियों से बाहर भी किसान अब अपनी फसल बेच सकेंगे। इसका लक्ष्य किसानों को अपनी फसल के लिए एक विस्तृत मार्किट उपलब्ध करवाने का है।

सकारात्मक पक्ष

  • इन बिलों की सहायता से किसानों को एक अतिरिक्त मार्केटिंग चैनल उपलब्ध हो जाएगा तथा APMCs की व्यवस्था यथावत रहेगी।

  • अगर किसान अपनी मंडियों से बाहर भी फसल बेच पाएंगे तो इससे वो अच्छी कीमत का लाभ भी उठा पाएंगे।  

नकारात्मक पक्ष

  • नए बिलों में MSP आधारित सरकारी  खरीद को समाप्त करने या फिर इसकी किसी  चरणबद्ध प्रक्रिया के बारे में भी किसी प्रकार का वर्णन नहीं है।

 
  • नए बिलों में MSP का जिक्र नहीं है तो यह भी संभावना है कि अगर किसान अपनी मंडियों से बाहर फसल बेचते है तो उनको MSP की कीमत से कम कीमत भी मिल सकती है ।

 

परिणाम

सरकारी खरीद के नए नियमों के साथ साथ MSP की व्यवस्था भी बनी रहेगी ।

निष्कर्ष :-

इस आंदोलन को ध्यान में रखते हुए इसका सबसे अच्छा समाधान तो यही रहेगा कि सरकार किसानों को MSP के बारे में लिखित आश्वाशन प्रदान कर दे तथा सरकारी खरीद की बात को भी स्पष्ट कर दे। दूर-दराज के गावों के किसानों की फसलों की बिक्री पर भी विशेष ध्यान दिया जाए जहां पर परिवहन के सुलभ साधन उपलब्ध नहीं है। 

MSP की व्यवस्था का अच्छे से इम्प्लीमेंटेशन करने पर जोर दिया जाना जरूरी है तथा सरकार जो भी नई व्यवस्था लाना चाहती है उसके साथ-साथ MSP की व्यवस्था पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका को भी ख़त्म किया जाना चाहिए। नए बिलों के बारे में अच्छे से किसानों को बताया जाए ताकि सोशल मीडिया के माध्यम से फैली कई भ्रांतियों को दूर किया जा सकें। 

हम आशा करते है की जल्द ही इस मामले का कुछ समाधान होगा जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हो तथा किसी भी प्रकार की आगामी जान-माल की हानि से बचा जा सकें। 

धन्यवाद !!

About the Author: Koja Ram | 32 Post(s)

Koja Ram is a 2nd year B Tech student at National Institute of Technology Jalandhar pursuing Chemical Engineering. He has a great ability to explain complicated financial terms in simple hindi language. He has an aim to make India financially literate. 

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