Intraday Trading की कड़वी सच्चाई

7 Apr 2021  Read 205 Views

शेयर मार्किट की दुनिया के भगवान् माने जाने वाले महान निवेशक Warren Buffet के बारे में तो आप जानते ही होंगे। सन 1996 में उनकी कंपनी Berkshire Hathway के इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा था - "Our portfolio shows little change: We continue to make more money when snoring than when active."

अर्थात शेयर मार्किट से अच्छा निवेश कमाने के लिए long term इन्वेस्टिंग की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसीलिए Berkshire Hathway के CEO ने यह बात कही थी कि किसी भी स्टॉक को इस मानसिकता के साथ खरीदना चाहिए कि हम उसको पूरी जिंदगीभर ख़ुशी-ख़ुशी होल्ड कर सकें। Warren Buffet उन कंपनियों में निवेश करना पसंद करते है जो फ़ण्डामेंटली मजबूत होती है तथा जो लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न देने की क्षमता रखती है।

लेकिन शेयर मार्किट में रूचि रखने वाले सभी लोगों के निवेश करने के तरीके तथा उनकी राय अलग-अलग होती है। कुछ लोग लॉन्ग टर्म में निवेश करना पसंद करते है तो कुछ शार्ट टर्म के लिए निवेश करना पसंद करते है वहीं कुछ लोग इंट्राडे ट्रेडिंग भी करते है।

Intraday Trading निवेश का सही तरीका क्यों नहीं है?

जब भी कोई व्यक्ति पहली बार स्टॉक मार्किट की दुनिया में कदम रखता है तो उसको इंट्राडे ट्रेडिंग बहुत अच्छा विकल्प लगता है लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। अगर आपको पता नहीं है तो आपको यह जान लेना चाहिए कि जब हम किसी कम्पनी के शेयर्स एक दिन खरीदकर वापिस उसी दिन बेच देते है तो इसे इंट्राडे ट्रेडिंग के नाम से जाना जाता है। इसमें स्टॉक्स को कुछ मिनट्स से लेकर कुछ घंटों तक होल्ड किया जाता है। हालाँकि कुछ लोग तो केवल कुछ सेकण्ड्स के लिए ही इसको होल्ड करके वापिस बेच देते है। मार्किट में तेजी से होने वाले फ्लक्चुएशन का फायदा उठाने के लिए  लोग ऐसा करते है। इसके विपरीत अगर हम स्टोक्स को कुछ महीनों से लेकर कुछ सालों तक होल्ड करते है तो इसको लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग के नाम से जाना जाता है। इस स्ट्रेटेजी में हम लॉन्ग टर्म रिटर्न को ही ज्यादा महत्व देते है न कि शार्ट टर्म में होने वाले मार्किट फ्लक्चुएशन को।

अलग-अलग व्यक्ति अपने हिसाब से अलग-अलग स्टाइल तथा भिन्न-भिन्न स्ट्रेटेजी का प्रयोग करते है। अगर हम इंट्राडे ट्रेडिंग की बात करे तो यह एक एक्टिव स्टाइल है क्योंकि इसमें निवेशक मार्किट में होने वाले शार्ट टर्म फ्लक्चुएशन का फायदा उठाकर पैसा कमाता है। इसके अलावा इंट्राडे ट्रेडिंग में आपको काफी ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने बैठकर मार्किट में होने वाले परिवर्तनों पर एक नजर रखनी पड़ती है तथा आपको अपना एक सिस्टम बनाना पड़ता है जिसपे आप ट्रेडिंग कर सकें।

वैसे यह काम काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि ग्लोबल मार्किट अलग अलग टाइम ज़ोन्स में काम करता है इसलिए हर देश में मार्किट के ओपन रहने की टाइमिंग भी अलग अलग रहती है। उदाहरण के तौर पर भारतीय मार्किट तथा यूरोपियन मार्किट अलग अलग समय पर खुलते है तथा अगर कोई व्यक्ति डे ट्रेडिंग में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना चाहता है तो उसको दोनों मार्किट पर निगाह रखनी होगी। इसके विपरीत अगर हम इन्वेस्टिंग की बात करे तो इसमें आपको एक बार शेयर खरीदने के बाद उतना स्क्रीन के सामने बैठने की भी जरूरत नहीं है तथा आप मासिक रूप से भी अपने स्टॉक्स का एनालिसिस कर सकते है।

इसके अलावा इंट्राडे ट्रेडिंग की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें आपको अनेक प्रकार के चार्जेज तथा फीस का  भुगतान करना पड़ता है। एक दिन में बहुत ज्यादा ट्रांसक्शन होते है तथा इन ट्रांसक्शन पर भिन्न भिन्न प्रकार के चार्जेज लगते है जैसे Transaction Charge, Brokerage, ब्रोकरेज पर GST, स्टाम्प ड्यूटी आदि तथा इन सबका योग एक भारी धनराशि के रूप में सामने आता है।

इसलिए अगर कोई ट्रेडर Break-even की स्थिति में रहना चाहता है तो भी हकीकत में उसको मार्किट में कुछ प्रॉफिट कमाना पड़ेगा क्योंकि ये सब चार्जेज भी लग जाते है। इंट्राडे ट्रेडिंग में होने वाले प्रॉफिट को Speculative Profit की श्रेणी में रखा गया है तथा ये प्रॉफिट Income Head of Business के अंतर्गत आता है इसलिए इसमें टैक्स भी सामान्य नियमों के अनुसार लगता है। अगर हम टैक्स बचाना चाहते है तो हमें निवेश करना होगा तथा उसके बाद शार्ट टर्म कैपिटल गेन या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के अनुसार टैक्स लगेगा जिसकी रेट कम होती है। इसके अलावा इंट्राडे ट्रेडिंग में आप मार्जिन लेकर भी ट्रेडिंग कर सकते है जिसका भुगतान वापिस ब्रोकर को करना पड़ता है।

आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इंट्राडे ट्रेडिंग में काफी रिस्क रहती है तथा आपका एक निर्णय आपको भारी घाटा करवा सकता है। इसीलिए अनेक एक्सपर्ट्स इंट्राडे ट्रेडिंग को एक जुआ मानते है। इसलिए नए निवेशकों को इंट्राडे ट्रेडिंग से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में फंडामेंटल एनालिसिस की बजाय टेक्निकल एनालिसिस के हिसाब से निर्णय लिए जाते है तथा टेक्निकल एनालिसिस में बहुत ज्यादा स्पेक्टूलेशन रहता है जो आपके लिए रिस्की हो सकता है। अगर आप इस प्रकार का रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं है तो आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप इंट्राडे ट्रेडिंग की बजाय इन्वेस्टिंग को ज्यादा महत्व दे क्योंकि इसमें रिस्क कम होता है। लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग करते समय आप आराम से अपना समय लेकर कंपनियों का विश्लेषण कर सकते है तथा उनको सही कीमत पर खरीदकर आप अपनी इन्वेस्टिंग की जर्नी को और खूबसूरत बना सकते है।

आपको ऐसी अनेक खबरें सुनने को मिलती होगी कि उस ट्रेडर ने एक दिन में इतना भारी प्रॉफिट कमा लिया लेकिन उस भारी प्रॉफिट के पीछे की सच्चाई यह है कि उसके लिए ट्रेडर को एक बड़ी धनराशि दांव पर लगानी होती है तथा भारी घाटे के सामना भी करना पड़ सकता है। अगर आप इसकी प्रोफेशनल तरीके से ट्रेनिंग लेना चाहते है तो भी आपको इसके लिए काफी पैसे लगाने पड़ेंगे। इसके अलावा यह भी बहुत जरूरी है कि आप इसे सिखने के लिए लगाने वाला पैसा सही जगह पर लगाए जिससे आपको इसका पूरा फायदा मिल सके क्योंकि आजकल अनेक प्रकार के फ्रॉड की खबरें भी मार्किट में आती रहती है।

जब भी कोई व्यक्ति पहली बार शेयर मार्किट में काम करना शुरू करता है तो उसके पास इतना ज्यादा नॉलेज तथा स्किल्स नहीं होती तथा इसीलिए अनेक इंट्राडे ट्रेडर अपना पैसा खो देते है तथा फिर शेयर मार्किट के बारे में एक गलत छवि लोगों में जाती है। इसके अलावा इंट्राडे ट्रेडिंग में प्रॉफिट कमाने तथा घाटे को सहन करने के लिए मानसिक रूप से भी व्यक्ति को तैयार रहना पड़ता है तथा साइकोलॉजी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते है कि इंट्राडे ट्रेडिंग कोई इन्वेस्ट करने का अच्छा तरीका नहीं है लेकिन हर चीज के कुछ फायदे तथा कुछ नुकसान होते है तथा यह बात इसमें भी लागु होती है। अगर फिर भी कोई इंट्राडे ट्रेडिंग करना चाहता है तो इसके बारे में पूरा नॉलेज प्राप्त करने के  बाद ही यह काम करना चाहिए। आजकल नॉलेज प्राप्त करने के बहुत सारे साधन उपलब्ध है। इसके अलावा आप पेपर ट्रेडिंग करके भी अपनी स्किल्स को और ज्यादा मजबूत कर सकते है।

जब भी हम किसी कंपनी के शेयर खरीदते है तो हम उसमे एक छोटा सा हिस्सा खरीद लेते है तथा शेयर मार्किट इसी कांसेप्ट पर टिका हुआ है लेकिन इंट्राडे ट्रेडिंग में इस नियम की पलना नहीं होती क्योंकि स्टॉक्स को कुछ मिनट्स या घंटों बाद बेच दिया जाता है इसीलिए Warren Buffet जैसे महान निवेशक भी इंट्राडे ट्रेडिंग के पक्ष में नहीं बोलते।

हमें आशा है कि इस आर्टिकल के माध्यम से आपको इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा तथा आपने जरूर कुछ नया सीखा होगा।

धन्यवाद!!

About the Author: Koja Ram | 28 Post(s)

Koja Ram is a 2nd year B Tech student at National Institute of Technology Jalandhar pursuing Chemical Engineering. He has a great ability to explain complicated financial terms in simple hindi language. He has an aim to make India financially literate. 

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