Manu Manek: शेयर बाजार का Black कोबरा

11 Jan 2021  Read 220 Views

"रिस्क है तो इश्क़ है" 
प्रतीक गाँधी का यह डायलॉग आजकल लोगों के दिलो दिमाग में छा चुका है। OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई वेब सीरिज़ 'Scam 1992' को लाखों लोगों का प्यार मिला है और प्रतीक गाँधी के डायलॉग लोगों के जहन में एक अलग ही जगह बना चुके है।

इस वेब सीरिज़ में भारतीय शेयर मार्केट के 'बिग बुल'  हर्षद मेहता की जीवनी को बड़े सजीव तरीके से चित्रित किया गया है। हर्षद मेहता का किरदार तो लोगों को पसंद आया ही है लेकिन साथ ही साथ इस वेब सीरिज़ के एक और किरदार ने भी लोगों की काफी वाहवाही लूटी है।

जी हाँ, हम बात कर रहे है भारतीय शेयर मार्केट के कोबरा कहलाने वाले manu manek की, जिनका अपने समय एक अलग ही रुतबा तथा प्रतिष्ठा थी।

हर्षद मेहता जहां बाजार को ऊपर उठाने की फ़िराक में रहता था तो वही दूसरी और manu manek हमेशा बाजार को गिराने की कोशिश करता था। manu manek की शक्ति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके कारण एक बार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) कुछ दिनों तक बंद रहा था।

तो आइये इनके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते है -

Manu Manek कौन थे?

बात सन 1970-80 के दशक के आख़िरी सालों की है जब भारतीय शेयर मार्केट का माहौल ऐसा नहीं था जैसा हमें आज दिखता है। आज NSE एक प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज है लेकिन उस समय तक NSE अस्तित्व में ही नहीं आया था। इसके अलावा आज हमें मार्केट में जितनी लिक्विडिटी (Liquidity) देखने को मिलती है उस समय इतनी लिक्विडिटी भी नहीं होती थी।

इसी दौर में भारतीय शेयर मार्केट में manu manek नाम के एक ऑपरेटर का बोलबाला था जिसे 'शेयर मार्केट के कोबरा' के नाम से जाना जाता था।

"K R Choksey Shares and Securities" के फाउंडर 'Kisan Ratilal Choksey' के अनुसार "मनु मानेक उस समय मार्केट में काफी प्रतिष्ठित तथा शक्तिशाली ऑपरेटर था। मनु मानेक का उस समय इतना वर्चस्व था कि उसकी सहमती के बिना किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी कंपनी के डायरेक्टर का पद संभालना नामुमकिन था। वह कंपनियों को कुछ नामों की लिस्ट भेजता था तथा उन्ही में से डायरेक्टर का चयन होता था"

Kisan Ratilal Choksey की इस टिप्पणी से हम इस बात का आसानी से अंदाजा लगा सकते है कि manu manek कितना शक्तिशाली था।

शुरुआत :-

एक अनुमान के अनुसार मनु मानेक का जन्म कोलकाता शहर में 1948 से 1952 के बीच हुआ था। अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने स्टॉक मार्केट में एक स्टॉकब्रोकर के रूप में काम करना शुरू किया। स्टॉकब्रोकर के रूप में कई वर्ष काम करके उसने शेयर मार्केट के बारे में काफी कुछ सीखा तथा उसने अपने इस नॉलेज का उपयोग करते हुए मार्केट का विश्लेषण करके अच्छा खासा प्रॉफिट कमाया।

कुछ वर्षों बाद उसकी मार्केट में अच्छी प्रतिष्ठा बन गई थी। दलाल स्ट्रीट के बड़े नामों में उसकी गिनती होने लगी थी।

उसके बारे में लोगों का कहना था कि भगवान ने मनु को एक अलग ही प्रकार की मानसिकता दी है जिससे वह कंपनियों का एनालिसिस बहुत अच्छे तरीके से कर पाता था। 1980 के आसपास मनु का मार्केट में काफी बोलबाला था तथा उसकी अनुमति या उसकी जानकारी के बिना मार्केट में कुछ भी नहीं होता था।

अनौपचारिक रूप से उसको King Of BSE के नाम से जाना जाता था तथा सभी स्टॉकब्रोकर्स  उसके इशारों पर काम करते थे।

वर्तमान में भारतीय शेयर बाजार के जितने भी प्रसिद्ध 'Bulls' या 'Bears' है उनमे से लगभग सभी लोगों के साथ manu manek के रिश्ते थे। इन लोगों में बिग बुल 'राकेश झुनझुनवाला' तथा DMart के फाउंडर 'राधाकिशन दमानी' तथा कुछ अन्य प्रसिद्ध निवेशक जैसे शंकर शर्मा, दिनेश डालमिया, अजय कायन, रामदेव अग्रवाल तथा निमेष कम्पलानी (वास्तविक अजय केडिया) भी शामिल है।

Economic Times  के अनुसार जब मनु मानेक शेयर बाजार में काम करते थे तो राधाकिशन दमानी उस समय काफी युवा थे तथा जब मनु मानेक Bull लोगों को औंधे मुंह गिराते थे तो उस समय राधाकिशन दमानी ने उनको देखते हुए काफी अनुभव हासिल किया।

Manu manek मार्केट को अपनी बेयरिश (Bearish) तथा शार्ट-सेलिंग रणनीतियों से मैनिपुलेट (Manipulate) करते थे।

                              

आइये एक बार शार्ट सेलिंग, बुलिश तथा बेयरिश स्ट्रेटेजी को समझते है -

बुलिश मूवमेंट :-

सामान्यतः निवेशक किसी कंपनी के शेयर्स उस समय खरीदते है जब शेयर की कीमत कम होती है तथा जब कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है तो कंपनी के शेयर की कीमत भी बढ़ती है। कीमत बढ़ने पर निवेशक अपने शेयर्स को बेचकर मुनाफ़ा कमा लेते है तथा इस प्रकार शेयर मार्केट में मुनाफ़ा कमाया जाता है।

जब कोई कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है तो उस कंपनी के शेयर की कीमत भी बढ़ती है और मार्केट में मुनाफ़ा कमाने की इस रणनीति को 'बुलिश स्ट्रेटेजी' के नाम से जाना जाता है। इस रणनीति का मूल सिद्धांत इस बात पर आधारित है कि अमुक कंपनी आने वाले समय में मार्केट में अच्छा प्रदर्शन करेगी जिससे उसके शेयर की कीमत में भी बढ़ोतरी होगी। शेयर मार्केट में इस प्रकार की पोजीशन को लॉन्ग पोजीशन के नाम से जाना जाता है।

बेयरिश मूवमेंट :-

यह स्ट्रेटेजी बुलिश स्ट्रेटेजी के बिलकुल विपरीत है। इस रणनीति में निवेशक ऐसी कंपनियों की खोज करते है जो पहले से ही काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है तथा अब उनके शेयर की कीमत गिरने की सम्भावना ज्यादा है।

किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत के भविष्य में गिरने का अनुमान लगाकर ही इस स्ट्रेटेजी में मुनाफ़ा कमाया जाता है और इस प्रकार की स्ट्रेटेजी को बेयरिश स्ट्रेटेजी (Bearish Strategy) के नाम से जाना जाता है। जब किसी शेयर की कीमत ज्यादा होती है तो निवेशक अपनी पोजीशन को होल्ड करके रखते है तथा शेयर की कीमत में गिरावट आने पर प्रॉफिट बुक कर लेते है। इस प्रकार की पोजीशन को शॉर्ट पोजीशन के नाम से जाना जाता है।

शॉर्ट सेलिंग (Short-Selling) :-

कोई भी निवेशक शेयर बाजार में 2 प्रकार से शॉर्ट सेलिंग कर सकता है -

अगर किसी निवेशक के पास पहले से किसी कंपनी के शेयर है तथा उसको ये लगता है कि अब कंपनी के शेयर की कीमत में गिरावट आने वाली है तो वो निवेशक अपने शेयर्स ऊंची कीमत पर बेच देता है तथा जब कंपनी के शेयर की कीमत में गिरावट आती है तो वो उसी कंपनी के शेयर पुनः खरीद लेता है।  शेयर की कीमत में आने वाला यह अंतर ही निवेशक के प्रॉफिट को निर्धारित करता है।

इसके अलावा एक दूसरी स्थिति तब बनती है जब कोई निवेशक उन शेयर्स की शॉर्ट सेलिंग करना चाहता है जो उसके पास नहीं है। इसके लिए निवेशक को कुछ शेयर्स किसी अन्य व्यक्ति या कंपनी से उधार लेने पड़ेंगे। ऐसा 2 तरीकों से किया जा सकता है -

सबसे पहला तरीका तो यह है कि निवेशक डेरीवेटिव(Derivative) के विकल्प का उपयोग कर ले जिसमे उसको उस कंपनी के स्टॉक का Put Option खरीदना पड़ेगा (यह विकल्प 1980 के दशक के शुरुआती सालों में उपलब्ध नहीं था)। इसके अलावा दूसरा तरीका यह हो सकता है कि अगर उस निवेशक के अपने स्टॉकब्रोकर के साथ सम्बन्ध अच्छे है तो वह स्टॉकब्रोकर से कुछ शेयर्स उधार ले सकता है।

Manu manek ने शेयर्स की उधारी की इसी रणनीति का उपयोग करते हुए मार्केट में अच्छा पैसा कमाया। इसी तरीके से मनु मानेक को प्रसिद्धी मिली तथा उसको "दलाल स्ट्रीट का कोबरा" के नाम से जाना जाने लगा।

1980 के दशक में कम ब्याज पर पैसा उधार लेना मुश्किल था। इसलिए बहुत सारे बड़े-बड़े निवेशक शेयर खरीदने के लिए  मनु मानेक से 20% से 30% तक की ब्याज दर पर पैसा उधार लेते थे। ये निवेशक मनु से पैसा लेकर जहां पर भी निवेश करते थे उसकी पूरी जानकारी मनु के पास रहती थी।

निवेशक शेयर्स में लॉन्ग पोजीशन बनाने के लिए काफी ज्यादा राशि उधार लेते थे ताकि शेयर की कीमत बढ़ने पर ज्यादा प्रॉफिट कमाया जा सकें तथा इसके कारण उस कंपनी के शेयर्स की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ जाती थी जिससे शेयर की कीमत में भी उसी प्रकार से बढ़ोतरी होती थी।

Manu manek सही समय के इंतजार में रहता था। जब शेयर्स की कीमत काफी बढ़ जाती थी तो कोबरा की मार्केट में एंट्री होती थी तथा वो शेयर्स की शॉर्ट पोजीशन बनानी शुरू कर देता था इससे निवेशकों पर अपने शेयर्स को बेचने के लिए काफी दबाव आ जाता था।

चूँकि शेयर्स की सप्लाई बढ़ने से शेयर्स की कीमत में भी गिरावट होती थी जिसके कारण बुलिश निवेशकों को काफी घाटा होता था तथा बेयरिश निवेशकों को फायदा होता था।

'Stewart and Company' के 'Sevantilal Shah' के अनुसार मनु मानेक के पास एक ऐसी योग्यता थी कि "वह मार्केट में चल रही किसी भी प्रकार की खामी का पता बहुत जल्दी लगा लेता था"

कुछ समय बाद manu manek ने एक Bear Cartel का निर्माण किया (जो लोग शेयर मार्केट में पैसा कमाने के लिए इसको मैनिपुलेट करते है उन लोगों को एक Cartel के रूप में जाना जाता है)। इस Cartel के 3 प्रमुख लोगों में राकेश झुनझुनवाला, राशाकिशन दमानी तथा राजू चार्टिस्ट शामिल थे (3R's)।  इन तीनों ने भी उसी स्ट्रेटेजी का उपयोग किया जिसकी सहायता से मनु मानेक ने काफी पैसा कमाया था। 

हर्षद मेहता vs The Bear Cartel :-

शेयर मार्केट के युद्ध में हर्षद मेहता का सामना कई बार manu manek से हुआ। इनमे सबसे प्रसिद्ध घटना उसको माना जाता है जब इनके बीच Indrol नाम की एक कंपनी के शेयर्स को लेकर काफी खींचतान चली।

मनु मानेक ने अपनी आदत के अनुसार इस कंपनी में शॉर्ट पोजीशन बना रखी थी तथा दूसरी और हर्षद मेहता यानी बिग बुल ने लॉन्ग पोजीशन को होल्ड कर रखा था। हर्षद ने शेयर की डिमांड को बढ़ा दिया जिससे शेयर की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई तथा Bear Cartel की मुश्किलें बढ़ गई।

अब Bear Cartel ने हर्षद मेहता की मार्केट में प्रतिष्ठा को गिराने के लिए यह झूठी अफ़वाह फैला दी कि हर्षद मेहता को स्टॉक मार्केट में 1 करोड़ रूपये का घाटा हुआ है। इसके खिलाफ एक्शन लेते हुए हर्षद मेहता ने अपने सभी इन्वेस्टर्स को एडवांस पेमेंट कर दिया ताकि उनके पैसे की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकें तथा मार्केट में प्रतिष्ठा बनी रहे तथा इस प्रकार हर्षद ने इस मुकाबले में जीत प्राप्त की।

Manu Manek vs. धीरूभाई अम्बानी :-

आप में से काफी कम लोगों को यह जानकारी होगी कि रिलायंस के शेयर्स को लेकर manu manek तथा धीरूभाई अंबानी में 1980 के दशक के अंतिम सालों में एक विवाद हुआ था।

1980 के दशक के अंतिम सालों में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही थी तथा धीरूभाई अंबानी अपने निवेशकों को अपने परिवार के सदस्यों की भांति सम्मान देते थे।

Kisan Ratilal Choksey के अनुसार  "धीरूभाई अंबानी इस बात के प्रति काफी गंभीर थे कि अगर उनके निवेशक उनसे खुश नहीं रहे तो उनको भविष्य में और ज्यादा निवेश नहीं मिल पाएगा तथा उनकी ग्रोथ भी नहीं हो पाएगी। इसके कारण वह अपने निवेशकों को अपने ही परिवार का सदस्य समझते थे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का प्रदर्शन तब तक अच्छा चल रहा जब तक कोबरा ने इस पर अपना धावा नहीं बोला।

मनु ने रिलायंस के शेयर्स की शॉर्ट सेलिंग करनी शुरू कर दी। manu manek को धीरूभाई अम्बानी की ताकत का अंदाजा नहीं था। धीरूभाई अंबानी ने स्थिति को समझते हुए अपने लेफ्टिनेंट 'आनंद जैन' को इस स्थिति से उबरने के ज़िम्मा सौंप दिया।

आनंद जैन तथा उसके साथियों ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर्स को खरीदना शुरू कर दिया। मनु मानेक ने जितने ज्यादा शेयर्स बेचे उतने ही आनंद ने खरीदने जारी रखें। अंततः रिलायंस के शेयर की कीमत फिर से बढ़ने लगी।

चूँकि Bear Cartel के पास हकीहत में किसी भी प्रकार के शेयर्स नहीं थे जबकि उन्होंने तो मार्केट से शेयर उधार लेकर उनको बेचना शुरू कर दिया था तथा उनकी सोच यह थी कि जब शेयर्स की कीमत गिरेगी तो शेयर्स को खरीद लिया जाएगा लेकिन रिलायंस के शेयर्स की कीमत में गिरावट नहीं आई तथा अब Bear Cartel पर इस चीज का बहुत ज्यादा दबाव था कि उनको हकीक़त में शेयर्स को डिलीवर करना पड़ेगा।

अब Bears के पास और कोई मौका नहीं था। उनके पास 2 विकल्प थे - या तो शेयर्स को ऊँचे दामों पर खरीद लिया जाए या फिर कुछ समय तक और इंतजार किया जाए जिससे शेयर्स की कीमत के और ऊँचे जाने की भी सम्भावना थी।

धीरूभाई अंबानी तथा Bear Cartel की बीच चल रहे इस युद्ध को देखते हुए BSE को कुछ दिनों तक बंद करना पड़ा। इसके बाद अंततः Bear Cartel ने अपने घुटने टेक दिए तथा धीरूभाई अंबानी व आनंद जैन को सभी प्रकार की बकाया धनराशि का भुगतान किया।

                            

निष्कर्ष :-

जैसा कि हमने इस आर्टिकल में सीखा कि manu manek ने अपनी शॉर्ट सेलिंग की तकनीक का उपयोग करते हुए मार्केट को काफी गिराया तथा भारी पैसा कमाया। जब तक मार्केट में बिग बुल की एंट्री नहीं हुई तब तक वो ऐसे ही निर्भित रूप से मार्केट को गिराता रहा।

Manu manek के साथ काम करने वाले अनेक व्यक्ति आज काफी सफल बन चुके है तथा अभी भी स्टॉक मार्केट में उनका बोलबाला है जिसमे राकेश झुनझुनवाला तथा राधाकिशन दमानी भी शामिल है।

अगर हम बिना जानकारी के स्टॉक मार्केट में किसी भी प्रकार का निवेश करते है तो यह एक जुए के समान है। जिस प्रकार जुए के खेल में व्यक्ति अपने सारे पैसे खो सकता है वैसे ही यहां भी बिना जानकारी निवेश करने से आपको बड़ा घाटा हो सकता है लेकिन अगर आप सही जानकारी तथा अनुशासन के साथ काम करते है तो आप यहां काफी अच्छा रिटर्न भी कमा सकते है।

इसलिए FINOLOGY की पूरी टीम की कोशिश यही रहती है कि आप तक बिलकुल सटीक निष्पक्ष जानकारी पहुँचाई जाए जिससे आप सही तरीके से निवेश करके अच्छा रिटर्न कमा सकें।

धन्यवाद !!

About the Author: Koja Ram | 3 Post(s)

Koja Ram is a 2nd year B Tech student at National Institute of Technology Jalandhar pursuing Chemical Engineering. He has a great ability to explain complicated financial terms in simple hindi language. He has an aim to make India financially literate. 

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