भारत के 10 मुख्य विलय (Merger) तथा अधिग्रहण (Acquisition)

23 Feb 2021  Read 182 Views

भले ही आप साइंस के स्टूडेंट रहे हो या नहीं लेकिन आपने चार्ल्स डार्विन का 'Survival Of the Fittest' का सिद्धांत तो जरूर सुना होगा। यानि जो अपने आप में मजबूत होता है वह अन्यों को हराकर अपना वर्चस्व चलाता है। अगर हम जंगली जानवरों की बात करे तो कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है जब अनेक प्रकार के जंगली जानवर एक विशाल शक्ति या जानवर का मुकाबला करने के लिए एकल हो जाते है।

लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि हम जंगली जानवरों के बारे में बातें क्यों कर रहे है? दरअसल हमने अभी जंगली जानवरों के बारे में जो चर्चा की वैसा ही कुछ दृश्य कई बार कंपनियों में भी देखने को मिलता है जब दो कंपनियों का विलय हो जाता है या फिर एक कंपनी दूसरी कंपनी को पूर्णतः खरीद लेती है।

इस आर्टिकल में हम 10 भारतीय डील्स की चर्चा करेंगे -

1. ई-कॉमर्स कंपनियों की डील :-

जब बात ई-कॉमर्स कंपनियों की हो रही हो तो फ्लिपकार्ट का नाम जरूर सामने आता है। इस कंपनी ने 2014 में Myntra को 2000 करोड़ रूपये में एक्वायर (Acquire) कर लिया था। फ्लिपकार्ट ने बुक्स बेचने के साथ-साथ अन्य सामान बेचने की दिशा में भी अपने पैर पसार दिए थे तथा 2017 में Jabong को एक्वायर करने के बाद तो फ्लिपकार्ट भारत की एक प्रमुख ई कॉमर्स कंपनी बन गयी।

इस डील के अगले साल ही वालमार्ट ने $16 बिलियन में फ्लिपकार्ट पर कब्ज़ा कर लिया। इस डील की वजह से वालमार्ट को इस फील्ड में अमेज़न से मुकाबला करने की एक ताकत मिल गयी।

इस प्रकार ई कॉमर्स सेक्टर की बड़ी डील्स में इन डील्स का नाम लिया जा सकता है।

2. रिटेल फ्यूचर डील :-

Future Value Retail Limited हकीकत में Future Group की ही एक रिटेल Subsidiary है। फ्यूचर ग्रुप ने सन 2016 में Heritage Foods को खरीदा था तथा Heritage को इस डील के फलस्वरूप फ्यूचर रिटेल में 3.95% हिस्सा मिला था। उस समय Heritage के शेयर्स का वैल्यूएशन ₹295 करोड़ रूपये था जो आज ₹600 करोड़ रूपये से भी ज्यादा है।

फ्यूचर रिटेल ने सन 2019 में अमेज़न के साथ भी एक डील की जिसमे अमेज़न ने Minority शेयर खरीदे थे तथा साथ में 3 साल बाद कंपनी में प्रमोटर्स के शेयर्स खरीदने का भी विकल्प था।

उपरोक्त दोनों डील्स की सहायता से फ्यूचर रिटेल EasyDay को विस्तृत करने की योजना बना रही है। 

3. स्टार्टअप की डील्स :-

अभी हाल ही में जोमैटो ने 2492 करोड़ रूपये में Uber Eats को Acquire कर लिया। स्टार्टअप्स में इस तरह की अनेक डील्स देखने को मिलती है क्योंकि अधिकतर स्टार्टअप्स बड़े इन्वेस्टर्स की फंडिंग पर टिके होते है तथा जैसे ही फंडिंग बंद होती है, इनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगता है। इस डील की मदद से जोमैटो अपने प्रतिद्व्न्दी Swiggy से मुकाबला करने में सक्षम हो पाएगा। 

इसी प्रकार ओला ने भी TaxiForSure को acquire कर लिया था। यह कंपनी वित्तीय संकट से गुजर रही थी तथा ओला ने इसका फायदा उठाते हुए इसको खरीद लिया। अब ओला इस डील के बाद अपने कॉम्पिटिटर Uber का मुकाबला अच्छे से कर पाएगी। 

4. व्हीकल्स कंपनियों की डील :-

फोर्ड तथा रतन टाटा की प्रसिद्ध कहानी तो आपने सूनी ही होगी। सन 2008 में Ford Motors की Subsidiary "Jaguar-Land Rover (JLR)" $520 मिलियन के घाटे में चल रही थी तथा कोई भी इस कंपनी को खरीदने की फ़िराक़ में नहीं था।

लेकिन रतन टाटा ने $2.3 बिलियन में JLR को खरीद लिया तथा सन 2019 में इस कंपनी ने $34000 मिलियन का प्रॉफिट भी हासिल किया। 

ऐसा भी कहा जाता है कि सन 1998 के आसपास एक बार टाटा अपनी कार कंपनी टाटा मोटर्स को फोर्ड को बेचना चाहते थे लेकिन फोर्ड ने ऑफर ठुकरा दिया इसके बाद टाटा ने जबरदस्त सफलता हासिल करते हुए 2008 में ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। 

5. स्टील कंपनियों की डील :-

विश्व के सबसे बड़े स्टील मार्किट देशों में भारत का नाम प्रमुखता से लिया जाता है क्योंकि भारत स्टील का प्रमुख उत्पादक तथा Consumer है। भारत में स्टील कंपनियों की तीन मुख्य डील्स इस प्रकार है -

मंडी के दौर में अनेक यूरोपीय कंपनियां दिवालिया होने के कगार पर थी और इसी समय भारतीय कंपनियों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए उन कंपनियों को खरीदने की योजना बनाई। 

मित्तल स्टील तथा Luxemberg की प्रसिद्ध स्टील कंपनी Arcelor Steel का विलय हो गया तथा इस $33.1 बिलियन की डील के बाद एक नई कंपनी Arcelor Steel का जन्म हुआ जो विश्व की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बन चुकी है। 

इसके अलावा अगर हम दूसरी डील की बात करे तो टाटा स्टील ने UK की कंपनी Corus Steel को $8.1 बिलियन में खरीद लिया तथा बाद में इसका नाम Tata Steel Europe रख दिया। लेकिन टाटा स्टील के अनेक अधिकारीयों के मुताबिक यह एक बुद्धिमतापूर्ण कदम नहीं था। 

टाटा स्टील ने हाल ही में 35,200 करोड़ रूपये में 'भूषण स्टील' को खरीद लिया। यह प्रक्रिया National Company Law Tribunal (NCLT) की देखरेख में पूर्ण हुई। हालाँकि वर्तमान में तो डील अच्छी ही नजर आ रही है लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह डील ArcelorMittal के कदमों पर चलती है या फिर Tata Steel Europe के कदमों पर। 

6. सीमेंट कंपनियों की डील :-

Jaiprakash Group की कंपनी Jaypee Cements पर काफी कर्ज था तथा ऐसा लग रहा था कि NCLT के द्वारा इस कंपनी को भी खरीद लिया जाएगा तथा Jaypee Cements को इस बात की चिंता थी कि उनको NCLT से अच्छी कीमतें भी नहीं मिलेगी क्योंकि NCLT को पता था कि यह कंपनी बिकने वाली थी। 

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अल्ट्राटेक सीमेंट की पैरेंट कंपनी आदित्य बिरला ग्रुप के पास जाने का निर्णय लिया। इस डील के बाद अल्ट्राटेक सीमेंट को न केवल भौगौलिक रूप से विस्तार करने का मौका मिला जबकि कई महंगे कॉन्ट्रैक्ट्स जैसे Expressways जैसे प्रोजेक्ट भी मिल गए जो Jaypee Associates के पास थे। यह डील 16189 करोड़ रूपये में संपन्न हुई तथा इसकी वजह से अल्ट्राटेक सीमेंट की क्षमता में 21 मिलियन टन का इजाफा हो गया। 

7. एग्रो केमिकल कंपनियों की डील :-

सन 2018 में भारतीय कंपनी UPL Ltd ने अमेरिकन कंपनी Arysta LifeScience को $4.2 बिलियन में Acquire कर लिया था। चूँकि UPL Ltd मुख्यतः फसल सुरक्षा तथा एग्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स से सम्बंधित बिज़नेस करती है इसलिए फार्म पेस्टिसाइड बिज़नेस में अपने पैर पसारने के लिए इसने Arysta के साथ ये डील की। इसकी वजह से UPL अनेक प्रकार के और नए प्रोडक्ट बनाने में सफल हुई तथा इसके फलस्वरूप अब यह विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी एग्रोकेमिकल कंपनी है तथा यह कंपनी अफ्रीका, लैटिन अमेरिका तथा चीन में भी अपना बिज़नेस करती है। 

8. HUL तथा GSK की डील :-

Hindustan Uniliver Limited (HUL) ने GlaxoSmithKline की GSK Consumer Healthcare को 27750 करोड़ रूपये में खरीद लिया। इस डील के फलस्वरूप HUL कंपनी को काफी फायदा हुआ क्योंकि Horlicks तथा Boost जैसे प्रोडक्ट इसके अधिकार में आ गए। चूँकि इस डील के बाद भारतीय FMCG मार्किट में कम्पटीशन काफी बढ़ गया था अतः NCLT का अप्रूवल लेना जरूरी था। 

चूँकि इस डील के बाद HUL को नए प्रोडक्ट्स बनाने तथा बेचने का मौका मिल गया तो वहीं GSK कंपनी डील के पैसों से बांग्लादेश में अपना ओरिजिनल प्रोडक्शन खोलेगी। 

9. आईडिया वोडाफोन डील :-

पिछले कुछ समय से टेलीकॉम सेक्टर अनेक प्रकार के संकटों से गुजर रहा है। 2G घोटाले के बाद सरकार ने भी इससे सम्बंधित अपनी नीतियों में काफी बदलाव किए है जिसके कारण इस सेक्टर पर अनेक प्रकार की परेशानियां आ चुकी है। 

भारतीय मार्किट में जिओ के आगमन के बाद जो एक क्रांति आई है उससे कोई भी अनजान नहीं है। इस नए प्रतिदव्न्दी का मुकाबला करने के लिए ही इन दोनों कंपनियों को एक साथ आना पड़ा। भारत में एयरटेल के बाद वोडाफोन आईडिया दूसरा सबसे बड़ा टेलीकॉम नेटवर्क है। 

इस Merger की एक खास बात यह है कि यह एक प्रकार से बराबरी का merger था क्योंकि नई कंपनी आईडिया वोडाफोन में वोडाफोन की 45.1% होल्डिंग्स थी तथा आदित्या बिरला ग्रुप तथा आईडिया के शेयर होल्डर्स के पास मिलकर कुल 54.9% होल्डिंग्स थी। 

10. पब्लिक सेक्टर कंपनियों की डील :-

पब्लिक सेक्टर कंपनियों की डील सरकार की सहमती तथा सुगमता के अनुसार होती है। PSU बैंकों का इनकारपोरेशन एक ऐसा ही उदाहरण है। हाल ही में LIC ने खराब परफॉरमेंस वाली IDBI बैंक को खरीद लिया था। 

चूँकि LIC एक ऐसी कंपनी है जो काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। वहीं दूसरी ओर IDBI घाटे में चल रही थी तथा इसका NPAs 31% से भी ज्यादा हो गया। इस बैंक के निजीकरण के बाद अनेक कर्मचारी संगठनों तथा कस्टमर्स ने भी अपनी असहमति जताई थी तथा इसके बाद लोगों की नजरें अन्य PSUs पर भी पड़ने लगी। 

LIC ने IDBI बैंक में 51% हिस्सेदारी खरीद ली। हालाँकि Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) किसी भी कंपनी के केवल 15% Acquisition की ही अनुमति देता है लेकिन फिर भी यह डील संपन्न हो गयी। 

इसी प्रकार ONGS ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) में 51% हिस्सेदारी खरीद ली।

निष्कर्ष :-

तो इस प्रकार इस आर्टिकल में हमने 10 मुख्य Mergers तथा Acquisitions के बारे में चर्चा की तथा इस प्रकार की डील्स से एक कस्टमर के तौर पर हमें भी फर्क पड़ता है। 

हम आशा करते है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी तथा आपको जरूर कुछ नया सिखने को मिला होगा। 

धन्यवाद !!

About the Author: Koja Ram | 15 Post(s)

Koja Ram is a 2nd year B Tech student at National Institute of Technology Jalandhar pursuing Chemical Engineering. He has a great ability to explain complicated financial terms in simple hindi language. He has an aim to make India financially literate. 

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